चोचौचंचः जे मनात उमटतं ते तसं तसंच्या तसंच

Wednesday, June 29, 2011

दुख को बाहोमे समेटना छोड दिया है मैने !!!

दुख को बाहोमे समेटना छोड दिया है मैने
सुख कभी मुठ्ठीमे में नही होता ये जान लिया मैने

बडे लोग कहते है की सुख मुठ्ठीमेसे रेत की तरह फिसल जाता है
सकारात्मकता खून में मिली और सुख को अपने ही हृदय में पाया मैने

जखमो को कुरेदना आदत थी मेरी
अपने पर ही आसू बहाना पसंद था मुझे
जखमोसे उपर सुख की चादर कभी ढून्डी नही मैने
मेरे पास ही थी ये कभी जाना ही नही मैने

आज सरकती जाती है जिंदगी अपने ही धून मै
मै भी गाता हू अपने ही सुकून से
ये शायद कोई चमत्कार माने कोई
अपने आप पा लिया है खुद को मैने

दुख का बसेरा होगा ये जानता है हर कोई
इम्तेहान हर किसीका होगा ये भी जानता हर कोई
अपनी ही धून में गीत गाता हू मै अभी
आगे बढना अब मेरी फितरत बन चुकी है ये जानता है हर कोई

प्र...साद जोशी
पुणे
२०.०६.२०११

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