दिल कां दरवाजा खुला ही रखा करो ..
कौन जाने कब जाना पहचानासा मुसाफीर लौट आये !
फिक्र ना करो अंजाम की ...
...
रिश्ते ही तो है संभल जायेंगे !
चिलमन से क्या पुछना
आंखे दस्तक जो दे रही है !
जाने की जिद जायज है जरूर
फिर लौट के आने कां बहाना धूंड लेना !
तकाजा होगा शायद उस लम्हे कां ....
अतीत के साये में गुम मत हो जाना
लौटते साये को हम भी ताक राहे है !
प्र...साद
०५/०३/२०११
कौन जाने कब जाना पहचानासा मुसाफीर लौट आये !
फिक्र ना करो अंजाम की ...
...
रिश्ते ही तो है संभल जायेंगे !
चिलमन से क्या पुछना
आंखे दस्तक जो दे रही है !
जाने की जिद जायज है जरूर
फिर लौट के आने कां बहाना धूंड लेना !
तकाजा होगा शायद उस लम्हे कां ....
अतीत के साये में गुम मत हो जाना
लौटते साये को हम भी ताक राहे है !
प्र...साद
०५/०३/२०११
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